Monday, 11 July 2022

जय शिव ओमकारा आरती


जय  शिव ओमकारा , ओम  जय शिव ओमकारा   

ब्रह्मा  ,   विष्णु  ,  सदाशिव   ,  अर्धांगी    धारा  

ओम जय

एकानन   चतुरानन     पंचानन    राजे    

हंसासन  गरुडासन  वृष  वाहन   साजे  

ओम जय

दो भुज चार चतुर्भुज  दसभुज अति सोहे  

त्रिगुण रूप निरखते , त्रिभुवन जन मोहे  

ओम जय

अक्ष   माला   वनमाला   मुंडमाला   धारी  

त्रिपुरारी   कंसारी    कर    माला   धारी  

ओम जय

श्वेताम्बर     पीताम्बर      बाघम्बर   अंगे  

सनकादिक  गरुणादिक  भूतादिक   संगे  

ओम जय

कर  के  मध्य  कमण्डलु  चक्र  त्रिशूलधारी  

सुखकारी   दुखकारी   जगपालन   कारी  

ओम जय

ब्रह्मा  विष्णु  सदाशिव  जानत  अविवेका  

प्रणवाक्षर   में  शोभित   ये   तीनो   एका  

ओम जय

त्रिगुण स्वामी जी की आरती जो कोई नर गावे

कहत  शिवानन्द  स्वामी  सुख सम्पति  पावे  

ओम जय शिव ओमकारा …..

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 त्रियम्बकं  यजामहे  सुगन्धिं  पुष्टिवर्धनं

उर्वारुकमिव बंधनात मृत्योर्मुक्षीय मामृतात  

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