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Thursday, 14 July 2022

पंचारती

 



जय जय सिद्धिविनायक गणपत सुंदर सुखकारी । 
वारो पंचारती बलि ज्याऊं मोहन दु:खहारी ॥ धृ ॥

चंदसुरजपरकास अनेक छबि लोभानी । 
नित है बाला भैरव गजमुख मूरत सो मानी ॥
कुंडल किरीट कलाससिभाल त्रिलोचन सुखदानी । 
एकदंत लंबोदर विषधर कटसों लपटानीं ॥ जय जय सिद्ध. ॥ १ ॥

भुजचारों अ भुखन लाजत तैसेहि आयुध जोर । 
कर कर हल्ला असुरनपर विजई आद पूजें च्यहूं ओर ।
कोमल अरुनचरन कल्हररवी क्या कहूं महिमाज्योर । 
सूर नर मुनी गुनी ध्यानसो मानत गोपदज्यल ॥ जय ॥ २ ॥

लाडिले जो आपहि तैसे वाहन मूषकसान । 
नृत्य करत तापर तबमोहे हरगौरीबेभान ॥
विद्या सकलकलाके स्वामी लेत बिबिघघनतान । 
छत्तीस बाजे लगरहे गन लेतहे गत परमान ॥ जय ॥ ३ ॥

कहांलों वखानु अपरंपार ज्यो गुण हे निगम अगाद । 
सत कहूं हितभावभगत तव ज्यो किरपालेसाद ॥ 
पावेंगो सुख भुगत मुगतको और नही लागेगो बाद । 

मंगिशसुत हे दास तुमारो घरकी ज्यानहर आद ॥ जय ॥ ४ ॥ 


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निवतो (बियाणा)

 ऐसा पान सुपरी डोड से,

जी थे तो देवो सुरजजी घर निवत्तो।

जी थे तो देवो गजानंदजीं घर निवत्तो।

जी थे तो देवो सगळा देवता घर निवत्तो।

बेगा बेगा आई जो बारन लाई जो।

देवता म्हार कारज सुधारण आई जो। आप घोडतल।

राण्या वो पालकडजी थाका छोआ मोठा बैठ सिगासन।

ऐसा पान सुणी डोडसजी थे तो देवो।

प्रकाशचद्रजी घर निवत्तो बेगा बेगा आईजो,

फुफाजी म्हार ओट बुवारन आई जो।

जिजाजी म्हार काग उडावण आई जो।

बावजी म्हार कारज सुधारण आई जो 1

फुफाजी घोडलड बाईजी पालकड जी थाका छोटा मोटा जेठ मोटरम।

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Monday, 11 July 2022

बाबा की ध्वजा


झंडो लहर लहर लहरावे रे बाबा रुणेचारा मेला में।

बाबा ढोल मंजीरा थारा बाजे। कोई वीणा खड़ताल बजावे रे।
झंडो लहर लहर....

बाबा रामसरोवर थारो।  कोई कुटुम्ब कबीला न्हावेरे।
झंडो लहर लहर....

बाबा मेळो भरे न्यारो न्यारो थाने देखत मन हरखावे रे।
झंडो लहर लहर....

कोई जात झडूला थारे देवे कोई चूरमा रो भोग लगावे रे।
झंडो लहर लहर....

बाबो अँधा ने आख्या देवे बांझियारी गोद भरावे रे।
झंडो लहर लहर....

बाबो निकलंक परचाधारी भक्तारी आस पुरवे रे।
झंडो लहर लहर....

बाबो भक्तारी अरज सुनलो थारी चरणारी टेर लगावे रे।
झंडो लहर लहर....

भाटी हरजी बुलावे थारो बाबो भक्ताने आशिष देवे रे।
झंडो लहर लहर....


 

झाला भाग ४

 

गौरी गणपत पूजस्याबालाजीर लागूँ पाय

कुल देवी सु बिनतीजोडी इबछल राख

गोरीरा पीव पातलिया ओ राजभवरजी

झाला दे घर आय

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गोरी ह एक रुप कीसोहे केतकी रंग

पनघट उपर जावतीसात सहेल्यारो संग 

गोरीरा पीव पातलिया ओ राजभवरजी

झाला दे घर आय

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पियाजीनं पाती भेजती,लिख हिडदारी बात

किस बीध लिखूँ थान ओळबाबैरेन चांदनी रात

गोरीरा पीव पातलिया ओ राजभवरजी

झाला दे घर आय

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शहरांम बाजा बाजियांगली गली शहनाई

बिंदराजा परणन आविया गौरी मन मुस्काई

गोरीरा पीव पातलिया ओ राजभवरजी

झाला दे घर आय

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पावामं पायल बाज़णीचूंदड लप्पादार

धीमी धीमी चालतीकर सोला सिनगार

गोरीरा पीव पातलिया ओ राजभवरजी

झाला दे घर आय

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मटलाम ढोल्योंढालतीबाती दई संजोय

बाईंजीरा बीरा आवसीबाती देई संजोय

गोरीरा पीव पातलिया ओ राजभवरजी

झाला दे घर आय

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छोटा सा इक तालमंकमल खिल्या चौफेर

जलमाहि रुप निरखताउभी काळजियारी कोर

गोरीरा पीव पातलिया ओ राजभवरजी

झाला दे घर आय

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लाल रंग रो मुठियो कंकर जड्या हजार

गोरी पेहर मुळकती राजिंदरी मनुहार

गोरीरा पीव पातलिया ओ राजभवरजी

झाला दे घर आय

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महलाम बिडला बनावती करती पियाजिन याद

आय अनचिता उभग्याजीव हिलोरा खाय

गोरीरा पीव पातलिया ओ राजभवरजी

झाला दे घर आय

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बाबुल केरे आंगणखेलं सहेल्यारे साथ

सासरिया अब जावसीसाजनियरो साथ

गोरीरा पीव पातलिया ओ राजभवरजी

झाला दे घर आय

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झाला भाग ३

मारवाड़ी शादियोमे "बड़ी बिनोरी" का अलग महत्त्व रहता है। पहले बिनायक, बना बनी, वारना और अंत में सभी सखियाँ बना या बनी के दोनों तरफसे खड़े रहकर आपसमे झाला गाती है।  एक बार एक तरफ़की सखियाँ गाएंगी और बादमे दूसरे तरफ़की। यह केवल मनोरंजन के लिए ही नहीं बल्कि नवदंपति के लिए विवाहके बाद मिलने वाले सुखोकाभी वर्णन तथा वधूके श्रृंगार की पूरी मालूमात रहती है। इस में खास कर दो पक्षो के बीच एकतरह का हसी मजाक वाला मुकाबला होता है।

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छ छल्ला छ मुंदड़ा जीवो राजभवरजी छल्ला भरी परात।

एक छल्ला र कारण जीवो राजभवरजी छोड्या मायर बापक।

गोरीरा पिव पातळीया जीवो राजभवरजी झाला ले घर आय।

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सूरज पूजन म्हे गयी, जीवो राजभवरजी ले गुगळ ले धुप ,

घडी एक मोड़ो उगजो,  जीवो राजभवरजी रजिन्द् निरखे रूप क। गोरीरा ---

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रजिन्द् फुलाव रो , जीवो राजभवरजी धुप पड्या कुमलाय

म्हे धन होती बादळी , जीवो राजभवरजीलेती सूरज छीपाय क।  गोरीरा ---

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महादेवजीर जावता, जीवो राजभवरजी पार्वतीन जोड्या हात ,

म्हे परमेश्वर पुजीया, जीवो राजभवरजी दिनों अमर सवाग क। गोरीरा---

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फुला भरियो छाबडो जीवो राजभवरजी सूरज पूजन जाय ,

सामा मिलिया सायबा जीवो राजभवरजी कळि कळि खुल जाय क।  गोरीरा---

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घेवर भरियो बाटको जीवो राजभवरजी पड्यो पलंग र हेट ,

लेती तो लाजा मरू जीवो राजभवरजी देख देवर जेठ क। गोरीरा---

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घेवर भरियो बाटको, जीवो राजभवरजी बर्फी रव्वादार ,

उठो रजिन्द् जिमलो, जीवो राजभवरजी गोरिरि मनवार क। गोरीरा

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चाँद सूरज म्हारा सुसरा , जीवो राजभवरजी तारा देवर जेठ ,

ननंदल आबा बिजली जीवो राजभवरजी चमके चारो देश क। गोरीरा---

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दाडम  फुले डागळ, जीवो राजभवरजी रस दाडम रे माय

गोरी फुले महलमे जीवो राजभवरजी जीव पियरे माय क। गोरीरा---

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झाला भाग २

 

मारवाड़ी शादियोमे "बड़ी बिनोरी" का अलग महत्त्व रहता है। पहले बिनायक, बना बनी, वारना और अंत में सभी सखियाँ बना या बनी के दोनों तरफसे खड़े रहकर आपसमे झाला गाती है।  एक बार एक तरफ़की सखियाँ गाएंगी और बादमे दूसरे तरफ़की। यह केवल मनोरंजन के लिए ही नहीं बल्कि नवदंपति के लिए विवाहके बाद मिलने वाले सुखोकाभी वर्णन तथा वधूके श्रृंगार की पूरी मालूमात रहती है। इस में खास कर दो पक्षो के बीच एकतरह का हसी मजाक वाला मुकाबला होता है।

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छ छल्ला छ मुंदड़ा जीवो राजभवरजी छल्ला भरी परात।

एक छल्ला र कारण जीवो राजभवरजी छोड्या मायर बापक।

गोरीरा पिव पातळीया जीवो राजभवरजी झाला ले घर आय।

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फूल गुलाबी ओढणो, जीवो राजभवरजी ऊपर पठानी गोठ ,

परनवाली अप्सरा, जीवो राजभवरजी निरखण वाला छेल क।  गोरीरा ---

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फूल गुलाबी ओढणो , जीवो राजभवरजी लप्या चेदि चार ,

महला माय झलकी पड्यो , जीवो राजभवरजी जागो राजकुमार क। गोरीरा ---

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फूल गुलाबी ओढणो, जीवो राजभवरजी पल्लो बांध्या मोट,

ईसा चतुरल पान पड़ी जावो, जीवो राजभवरजी नितका  देव नोट क।  गोरीरा ---

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फूल गुलाबी ओढणो,  जीवो राजभवरजी छाट पड्या रंग जाय ,

रजिन्द् को कई रूसणो, जीवो राजभवरजी सांज पडया मन जाय क। गोरीरा ---

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फूल गुलाबी ओढ़णो, जीवो राजभवरजी चिमका दाटोदाट ,

हौशी मनरा सायबा , जीवो राजभवरजी रूपया खर्चा साठ क। गोरीरा ---

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फूल गुलाबी ओढणो , जीवो राजभवरजी ओढू बार तिवार ,

रजिन्द् केवे ओढल्यो , जीवो राजभवरजी सासुजी बोल्या जाय , क। गोरीरा ---

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झाला भाग १

 

मारवाड़ी शादियोमे "बड़ी बिनोरी" का अलग महत्त्व रहता है। पहले बिनायक, बना बनी, वारना और अंत में सभी सखियाँ बना या बनी के दोनों तरफसे खड़े रहकर आपसमे झाला गाती है।  एक बार एक तरफ़की सखियाँ गाएंगी और बादमे दूसरे तरफ़की। यह केवल मनोरंजन के लिए ही नहीं बल्कि नवदंपति के लिए विवाहके बाद मिलने वाले सुखोकाभी वर्णन तथा वधूके श्रृंगार की पूरी मालूमात रहती है। इस में खास कर दो पक्षो के बीच एकतरह का हसी मजाक वाला मुकाबला होता है।

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छ छल्ला छ मुंदड़ा जीवो राजभवरजी छल्ला भरी परात।

एक छल्ला र कारण जीवो राजभवरजी छोड्या मायर बापक।

गोरीरा पिव पातळीया जीवो राजभवरजी झाला ले घर आय।

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चांदा थार चांदन , जीवो राजभवरजी पाणी  गईरे तलाव ,

काटो भाग्यो केरको, जीवो राजभवरजी उभी झोला झाला खाय क। गोरीरा ---

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कुन म्हारो काटो काढसी, जीवो राजभवरजी कुन पकड़ी पाँव ,

कुन म्हारो शिरो रांदसी, जीवो राजभवरजी कुन म्हारो सेके  पाँव क।  गोरीरा ---

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नाइ काटो काढसी, जीवो राजभवरजी रजिन्द् पकडे पाँव ,

सासुजी शिरो रांदसी, जीवो राजभवरजी बैजी सेके पाँव क। गोरीरा ---

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दोरो  काटो काढियो, जीवो राजभवरजी सोरो पकड्यो पाँव ,

काचो शिरो रांदियो, जीवो राजभवरजी बाईजी बाळयो पाँव क।  गोरीरा ---

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नाइकाने नोटका , जीवो राजभवरजी रजिन्द् ने सर पाग ,

सासुजीने सदी सावटी  जीवो राजभवरजी बाइजीने बाला चुन्दडी क। गोरीरा  ---

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चांदा थोर  चांदनी, जीवो राजभवरजी सूती पिलंग बिछाय ,

जब जागु  जब एकली , जीवो राजभवरजी जीव पियरी माय क।  गोरीरा ---

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बाली

  बाली को ब्रम्हा जी से ये वरदान प्राप्त हुआ   की, 'जो भी उससे युद्ध करने उसके सामने आएगा ,  उसकी आधी ताक़त बाली के शरीर मे चली जायेगी , ...