वन्दे मातरम साथियों ! आज आपके साथ चार लाइनें साझा कर रही हु। ये हनुमानजी के आव्हान के लिए है जब आप रामकथा पढ़ रहे हो।
श्री राम कथा के रसिक वर। भक्ति राज मती धीर।
आय सुवासन लेय प्रभो। तेज पुंज महावीर।
लाल देह लाली लेस। अरुधर लाल लंगूर।
बज्र देह दानवु दलन। जय जय जय कपि सुर।
पवन तनय संकट हरण। मंगल मूर्ति रूप।
राम लखन सीता सहित। ह्रदय बसहु सुरभूप।
श्री तुलसी कृत रामायण। कथा बुद्धि अनुरूप।
आयसु आसन लिजियो। बिराजे पवन कुमार।
कथा प्रारम्भ होत है। सुनहु बीर हनुमान।
आसन लीजो प्रेमसे। आ गए पवन कुमार।
यहाँ तक पढ़ने के लिए धन्यवाद! कृपया एक बार कमेंट में जय श्री राम का जयकारा कर अपनी उपस्थिति यहाँ दर्ज कराये। रामजी के नाम के साथ इसे हर जगह शेयर करिये।
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