।। ऊँ श्री परमात्मने नम: ।।
हमारे शरीर पर मन का प्रभाव पड़ता है यह सब जानते है। जब शरीर बीमार रहता है तब मन छोटी छोटी बातों पर चिड़ - चिड़ करता है ' जल्दी परेशान हो जाता है। उसी तरह मन का प्रभाव शरीर के स्वास्थ्य पर भी होता हैं। इसलिए शरीर को स्वस्थ रखने के लिए मन और शरीर दोनों को समझना चाहिए ।
शरीर को तंदुरुस्त बनाने के लिए जबान पर और मानसिक स्वास्थ्य प्राप्त करने के लिए मन पर लगाम रखनी चाहिए ।शरीर पर मन का और मन पर शरीर पर गहरा असर होता हैं इसलिए जब हमारा मन हमारा कहना मानने लगेगा तब स्वास्थ्य रहना हमारे वश मे होगा । आप अपने शरीर व मन के मालिक बनोगे न कि शरीर और मन आपके मालिक बनेंगे ।
जब हमारी आँखें वही देखेगी ' जो हमें देखना चाहिए तब मन की कल्पना का घोड़ा नियंत्रण में रहेगा ।। जब हमारे कान वही सुनेगे ' जो हमें सुनना चाहिए तब हमें आध्यात्मिक स्वास्थ्य प्राप्त होगा । जब हमारी जबान वही खायेगी जो हमें खाना चाहिए तब हमें शारीरिक स्वास्थ्य प्राप्त होगा । जब हमारी जबान वही कहेगी जो हमें कहना चाहिए तब हमारे रिश्ते स्वस्थ बनेंगे ।
आपका स्वास्थ्य आपके मन के वश मे है ' अगर ऐसा कहा जाए तो यह गलत नहीं होगा । जो लोग सदा नफरत ' घृणा ' द्वेष के विचार मन में रखते हैं वे पेट व दिल के कई रोगों को आमंत्रित करते है । कई बार दिल का दौरा ' नफरत का दौरा होता हैं । नकारात्मक विचारों का हमला यानी चिंता और निराशा का हमला। चिंता से भरा मन इंसान को पागल तक बना सकता है । चिंता का जहर धीरे धीरे फैलने लगता हैं और इंसान को बीमारियों का रोगालय बना देता है ।
नकारात्मक विचार मन से सारा उत्साह छीन लेते है जिस वजह से इंसान व्याकुल व निराश रहने लगता हैं ।
नकारात्मक विचार मन से सारा उत्साह छीन लेते है जिस वजह से इंसान व्याकुल व निराश रहने लगता हैं ।
ऐसा इंसान जीवन की आशा छोड़ बैठते है । जीवन की आशा छूट जाने से इंसान स्वास्थ्य होने मे बहुत समय लगाता है । जिस इंसान में जीवन की आशा ' जीने की प्रबल इच्छा होती हैं ' वह तेजी से स्वास्थ्य प्राप्त करता है। जिसका मन रचनात्मक और सृजनात्मक विचारों से भरा होता हैं उसकी जीने की प्रबल इच्छा होती है। वे हर रोग से बड़ी से बड़ी बीमारी से लड़कर बाहर आ जाते है । अपने मन में इसी आशा को जगाये रखें अपने मूल उद्देश्य को सदा अपनी आँखों के सामने रखे । बार बार भूल जाने पर भी फिर फिर से उसे तब तक याद करें जब तक आप उसमें पूरी तरह रम नहीं जाते ।
जय जय श्री राधे राधे राधे राधे राधे राधे
जय जय श्री राधे राधे राधे राधे राधे राधे
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे । हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे ।
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