Tuesday, 5 July 2022

श्री जगदीश्वरजी की आरती

|| ॐ जय जगदीश हरे ||

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे

भक्त जनों के संकट, दास जनों के संकट, क्षण में दूर करे ||

जो ध्यावे फल पावे, दुख विनसे मन का स्वामी दुख विनसे मन का

सुख सम्पति घर आवे, कष्ट मिटे तन का ||

|| ॐ जय जगदीश हरे ||

मात पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी स्वामी शरण गहूं मैं किसकी

तुम बिन और न दूजा, आस करूं मैं जिसकी ||

|| ॐ जय जगदीश हरे ||

तुम पूरण परमात्मा, तुम अंतर्यामी स्वामी तुम अंतर्यामी

पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सब के स्वामी ||

|| ॐ जय जगदीश हरे ||

तुम करुणा के सागर, तुम पालन कर्ता स्वामी तुम पालन कर्ता

मैं मूरख खल कामी ,कृपा करो भर्ता ||

|| ॐ जय जगदीश हरे ||

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति, स्वामी सबके प्राणपति,

किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति ||

|| ॐ जय जगदीश हरे ||

दीनबंधु दुखहर्ता, ठाकुर तुम मेरे, स्वामी ठाकुर तुम मेरे

अपने हाथ उठा‌ओ, द्वार पड़ा तेरे ||

|| ॐ जय जगदीश हरे ||

विषय विकार मिटा‌ओ, पाप हरो देवा, स्वमी पाप हरो देवा,

श्रद्धा भक्ति बढ़ा‌ओ, संतन की सेवा ||

|| ॐ जय जगदीश हरे ||

श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे,स्वामी जो कोई नर गावे।

कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे ||

|| ॐ जय जगदीश हरे ||



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