जय श्री राम सखियों और सखाओ ! आज आपके लिए एक राजा की कहानी लायी हु। कृपया अंततक पढ़े।
मसूली राज्य के एक राजा कान्हा को पक्षी पालने का शौक था। उनके पास कई तरह के पक्षी थे। उनमे से एक बाज राजा कान्हा को इतना प्रिय था की उसको हमेशा अपने कंधे या हाथ पर बैठाए रखते और कही जाते तो उसे अपने साथ लेकर जाते। राजसभा हो या और कोई कार्य वह बाज हमेशा राजा कान्हा के पास रहता था।
एक दिन महाराज कान्हा वन में आखेट करने गए। एक हिरन का पीछा करते करते उनका घोड़ा दुसरे साथियों से आगे बढ़ गया। राजा वन में भटक गए। हमेशा की तरह वह बाज भी उनके साथ था।
महाराज कान्हा को बहुत प्यास लगी थी। प्यास के मारे वे पानी को तलाशते सब और देखते हुए चल रहे थे। उनका बाज भी उनके साथ धीरे धीरे उड़ रहा था। घूमते घूमते उन्होंने देखा की एक चट्टान पर बूंद बूंद कर के पानी गिर रहा है। महाराज कान्हा को प्रसन्नता हुई।
महाराज कान्हा ने वहा लोटा रख दिया और कुछ देर में बून्द बून्द जमा होकर लोटा भर गया। महाराज कान्हा को प्यास के कारण उस पानी को पिने की चाह थी और वे उस लोटे को उठाने के लिए आगे बढे। किन्तु तभी उनके कंधे पर बैठे बाज ने उस लोटे को गिरा दिया जिससे सारा पानी गिर गया। बाज की इस हरकत पर राजा कान्हा को बहुत क्रोध आया।
किन्तु महाराज कान्हा को अत्यंत प्यास लगी थी तो उन्होंने अपने क्रोध को शांत करते हुए लोटा फिरसे भरने लगा दिया। थोड़ी देर बाद फिरसे बाज ने लोटे को पंख मारकर गिरा दिया। क्रोधित राजा कान्हा ने बाज को तलवार के एक ही वार में मार डाला।
महाराज कान्हा ने उस बाज को मारने के बाद फिरसे उस लोटे को भरने के लिए रख दिया तभी राजा का ध्यान चट्टान के ऊपर जहा से पानी टपक रहा था उस जगह गया। महाराज कान्हा ने देखा की उस जगह एक साप मरा हुआ था और पानी उस पर से होते हुए निचे टपक रहा था। जिसकी वजह से पानी विषैला हो गया था। और उस विषैले पानी को महाराज कान्हा ने नहीं पीना चाहिए इसीलिए वह बाज उस लोटे को बार बार गिरा रहा था।
यह सब देख राजा को बहुत पछतावा हुआ। पर अब उसका कोई अर्थ नहीं था। महाराज कान्हा का बाज मर चूका था। पर राजा ने इस घटना से सिख लेकर प्रण किया की आगे से वे अपने प्रिय पक्षियों की हरकतों से वे क्या कहना चाहते है ये समझने की कोशिश करेंगे।
एक बात हमेशा समझनी चाहिए की आज के समय में हितैषी मित्र कम होते जा रहे है और अगर कोई शुभचिंतक हमारे पास है तो हमें उसके लिए ईश्वर का धन्यवाद देना चाहिए। अगर आपके जीवन में भी कोई हितचिंतक है तो उसका नाम लेकर कमेंट में ईश्वर का धन्यवाद करिये। यहाँ तक पढ़ने के लिए धन्यवाद।
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