Saturday, 20 August 2022

सुविचार संग्रह ४

 

घड़ी-घड़ी घड़ी मत देखो

सिर्फ एक घड़ी प्रभु को देखो

जिंदगी की हर घड़ी सुधर जाएगी!

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जानने एवं समझने में अंतर होता है हमें बहुत से लोग जानते  हैं, मगर समझने वाले कुछ एक ही होते हैं

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सच्चे और शुभचिंतक लोग हमारे जीवन में सितारों की तरह होते है!!

वो चमकते तो सदैव ही रहते है, परंतु दिखायी तभी देते है, जब अंधकार छा जाता है

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जब आप परेशान होते हो तो खुद को मन से कमजोर महसूस करते हो,

जब आप परेशानी को खुद पर हावी नहीं होने देते तब आप खुद को मन से मजबूत पाते हो,

परेशानियों से जीवन तो भरा हुआ है ही,कदम-कदम पर कोई न कोई परेशानी तो आएगी ही,जो  आपको चिंता से ग्रसित करेगी,

परेशानियों का हल तो केवल आपकी मानसिक स्थिति पर निर्भर करता है,

यदि आप खुद को परेशानियों से निकालना चाहोगे तो आपको स्वयं ही स्वयं की मदद करनी होगी, अपने मन को मजबूत बनाना होगा

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मन और मकान को वक्त - वक्त पर साफ करना बहुत जरूरी है। क्योंकि मकान में बेमतलब का सामान और मन में बेमतलब की गलतफहमियां भर जाती हैं

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जीवन में आपसे कौन मिलेगा, ये समय तय करेग जीवन में आप किस से मिलेंगे, ये आपका दिल तय करेगा परंतु जीवन में आप किस-किस के दिल में बने रहेंगे, यह आपका व्यवहार तय करेगा

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परिंदों को मंज़िल मिलेगी हमेशा यह फैले हुए उनके पंख बोलते हैं

और वही लोग रहते हैं खामोश अक्सर ज़माने में जिनके हुनर बोलते हैं

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मुमकिन नहीं वतन से टूट जाए रिश्ता हमारा!

जिस खाक से उगे है फना उसी खाक में होना है !!

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स्वभाव रखना है तो उस दीपक की तरह  रखिये, जो बादशाह के महल में भी उतनी ही रोशनी देता है जितनी की किसी गरीब की झोपड़ी  में

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सुख पाने के लिए हम इच्छाओं की कतार लगाएं,

या आशाओं के अम्बार,

परंतु सुख का ताला केवल और केवल संतुष्टि की चाबी से ही खुलता है।

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बदन मेरा मिट्टी का

सांस मेरी उधार है

घमंड करु तो किस बात का

हम सब उसके ही तो

किरायेदार है

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अकड और अभिमान एक मानसिक बिमारी है

जिसका इलाज समय औऱ कुदरत जरूर करता है

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टेढ़े के साथ टेढ़ा हो जाना तो जगत में सभी को आता है और यह स्वाभाविक ही है;

लेकिन टेढ़े के साथ सीधा रहने का चमत्कार केवल ज्ञानी व्यक्ति ही कर पाते हैं।

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जब किसी महापुरुष से पूछा गया कि गुस्सा क्या चीज़ है?

तो महापुरुष ने बहुत खूबसूरत जवाब दिया, किसी की गलती की सज़ा खुद को देना।

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किसी से उम्मीद किए बिना उसका अच्छा करो, क्योंकि किसी ने कहा है, कि जो लोग फूल बेचते हैं उनके हाथ में खुश्बू अक्सर रह जाती है।

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व्यक्तित्व की भी

अपनी वाणी होती है,

जो कलम' या जीभ

के इस्तेमाल के बिना भी,

लोगों के अंर्तमन को छू जाती है!!!

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