पति-पत्नी एक बनाया गया रिश्ता है। कई मामलोंमें तो, "पहले कभी एक दुसरे को देखा भी नहीं था, अब सारी जिंदगी एक दुसरे के साथ, पहले अपरिचित, फिर धीरे धीरे होता गया परिचय, धीरे-धीरे होने वाला स्पर्श, फिर नोकझोंक, झगड़े, बोलचाल बंद, कभी जिद, कभी अहम का भाव" ये सारी बातें होती है। और जिंदगी में फिर धीरे धीरे बनती जाती प्रेम पुष्पों की माला, और जब दो जिस्म एक जान वाली एकजीवता की फिलिंग, एक दूसरे की तृप्तता सबसे पहले वाली सोच वैवाहिक जीवन को परिपक्व करती है। समय तो लगता है चाहे वो प्रेमविवाह क्यों न हो और फिर जीवन में स्वाद और मिठास आ बसती है। अब यही मिठास काफी है जिंदगीभर एक दूजे के साथ और एक दूजे के लिए जीने के लिए। समय के साथ रिश्ता मजबूत होता है बढती उम्र के साथ एक दूसरे की आदत हो जाती है। यही सच है। अब गृहस्थी ऐसीही है।
लेकिन आजकल की टेक्नोलॉजी की दुनिया में ये रिश्ता अपनी मिठास लेना ही कही भूल गया है। अब कानून के दायरे में भी शादी के तोड़ने के उपाय है। पर क्या शादी तोड़ देना उपाय है सभी समस्याओ का? कुछ हिसंक केसेस छोड़ दी तो गृहस्थी बचाना यही सही उपाय है। एक कविता मुझे इस मामले में बहोत पसंद आयी - जिसने भी लिखी है उसको मेरा नमन है बस वही यहाँ शेयर कर रही हु। पूरी कविता अवश्य पढ़े - शायद अपने पार्टनर के साथ अपना रिश्ता प्यारभरा करने की लिए कोई नुस्खा आपके काम आ जाये।
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