अपठित गद्य
हिंदी भाषा विषय के छात्रों के साथ यह लेख अवश्य शेयर करे| यह लेख मुझे सोशल मिडिया से मिला हैं| इस लेख को हर उस युवक ने ध्यानपूर्वक पढना चाहिए जो प्राचीन संस्कृति की धरोहर को संभालना चाहता हैं | युवा पीढ़ी इसे ध्यान से पढ़े इसके लिए ही इसे अपठित गद्य के रूप में यहाँ लिखा गया हैं| जिस लेखक ने इसे लिखा हैं मुझे उनका नाम तो नहीं पता पर हा मैं उनका धन्यवाद देती हु की उन्होंने ये लेख लिखा हैं| तो यह लेख ध्यान पूर्वक पढ़े और निचे दिए प्रश्नों के उत्तर दे|
लेख
जब हम हमारे धर्मग्रंथों को पढ़ते हैं तो हम पाते हैं कि हमारे सारे धर्मग्रंथ राक्षसों के वध से भरे पड़े हैं| राक्षस भी ऐसे ऐसे वरदानों से सुरक्थेषित थे कि दिमाग घूम जाए| किसी को वरदान प्राप्त था कि वो न दिन में मरेगा-न रात में, न आदमी से मरेगा-न जानवर से, न घर में मरेगा-न बाहर, न आकाश में मरेगा- न धरती पर| उसी तरह, दूसरे को वरदान था कि वे भगवान भोलेनाथ और विष्णु के संयोग से उत्पन्न पुत्र से ही मरेगा| तो, किसी को वरदान था कि, उसके खून की जितनी बूंदे जमीन पर गिरेगी, उसकी उतनी प्रतिलिपि पैदा हो जाएगी| तो, कोई अपने नाभि में अमृत कलश छुपाए बैठा था|
लेकिन, हर राक्षस का वध हुआ| हालाँकि, सभी राक्षसों का वध अलग अलग देवताओं ने अलग अलग कालखंड एवं अलग अलग प्रदेशों में किया| लेकिन, सभी वध में एक चीज समान थी किसी भी राक्षस का वध उसका स्पेशल स्टेटस हटाकर अर्थात उसके वरदान को कैंसिल कर के नहीं किया गया| कि, तुम इतना उत्पात मचा रहे हो इसीलिए, हम तुम्हारा वरदान कैंसिल कर रहे हैं| और, फिर उसका वध कर दिया| बल्कि, हुआ ये कि, देवताओं को उन राक्षसों को निपटाने के लिए उसी वरदान में से रास्ता निकालना पड़ा कि इस वरदान के मौजूद रहते हम इसे कैसे निपटा सकते हैं|
और, अंततः कोशिश करने पर वो रास्ता निकला भी| एवं, सब राक्षस निपटाए भी गए| कहने का मतलब है कि, परिस्थिति कभी भी अनुकूल होती नहीं है बल्कि उसे पुरुषार्थ से अनुकूल बनाई जाती है| आप किसी भी एक राक्षस के बारे में सिर्फ कल्पना कर के देखें कि अगर उसके संदर्भ में अनुकूल परिस्थिति का इंतजार किया जाता तो क्या वो अनुकूल परिस्थिति कभी आती?
उदाहरण के लिए सर्वचर्चित रावण को ही ले लेते हैं| रावण के बारे में भी ये एक्सक्यूज दिया जा सकता था कि, रावण को कैसे मारेंगे भला? उसे तो पचासों तीर मारे और उसके सर को काट भी दिए| लेकिन, उसका सर फिर जुड़ जाता है तो इसमें हम क्या करें ? इसके बाद अपने इस अपयश का सारा ठीकरा रावण को ऐसा वरदान देने वाले ब्रह्मा पर फोड़ दिया जाता कि| उन्होंने ही रावण को ऐसा वरदान दे रखा है कि अब उसे मारना असंभव हो चुका है| और फिर| ब्रह्मा पर ये आरोप डाल कर चल दिया कि जब ब्रह्मा खुद रावण को ऐसा अमरत्व के सरीखा वरदान देकर धरती पर राक्षसों का राज लाने में लगे हैं तो भला हम क्या कर सकते हैं|
लेकिन, ऐसा नहीं हुआ| बल्कि, भगवान राम ने उन वरदानों के मौजूद रहते ही रावण का वध किया| क्योंकि, यही "सिस्टम" है| क्योंकि, हमारे पौराणिक धर्मग्रंथों में ऐसे एक भी साक्ष्य नहीं मिलते हैं कि किसी राक्षस के स्पेशल स्टेटस (वरदान) को हटा कर पहले परिस्थिति अनुकूल की गई हो तदुपरांत उसका वध किया गया हो|
परंतु, हर युग में एक चीज अवश्य हुआ है| और, वो है राक्षसों का विनाश| एवं, सनातन धर्म की पुनर्स्थापना| लेकिन, घूम फिर कर बात वहीं आकर खड़ी हो जाती है कि, भले त्रेतायुग के भगवान राम हों अथवा द्वापर के श्रीकृष्ण, राक्षसों के विनाश के लिए हर किसी को जनसहयोग की आवश्यकता पड़ी थी| हर युग में राक्षसों के विनाश में जनसहयोग की आवश्यकता सिर्फ राक्षसों के विनाश के लिए ही नहीं पड़ती है| बल्कि, इसीलिए भी पड़ती है ताकि, राक्षसों के विनाश के बाद जो एक नई दुनिया बनेगी, उस नई दुनिया को उनके बाद के लोग संभाल सके| इसीलिए निषादराज, वानर राज सुग्रीव, वीर हनुमान, जामवंत आदि को गले लगाया गया है| और, माता शबरी को उचित सम्मान दिया गया है| वरना, सोचने वाली बात है कि जो रावण, पंचवटी में लक्ष्मण के तीर से खींची हुई एक रेखा तक को पार नहीं कर पाया था, भला उसे पंचवटी से ही एक तीर मारकर निपटा देना क्या मुश्किल था?
अथवा, जिस महाभारत को श्रीकृष्ण सुदर्शन चक्र के प्रयोग से महज 5 मिनट में निपटा सकते थे भला उसके लिए 18 दिन तक युद्ध लड़ने की क्या जरूरत थी| लेकिन, रणनीति में हर चीज का एक महत्व होता है, जिसके काफी दूरगामी
परिणाम होते हैं|
धर्मग्रंथ रोज सुबह
नहा धो कर सिर्फ पुण्य कमाने के उद्देश्य से पढ़ने के लिए नहीं होती है| बल्कि, हमारे धर्मग्रंथों के रूप में
हमारे पूर्वज/देवताओं ने अपने अनुभव हमें ये बताने के लिए लिपिबद्ध किया है ताकि
उनके आगामी वंशज ये जान सकें अगर भविष्य में फिर कभी ऐसी स्थिति उत्पन्न होगी तो
उससे कैसे निपटा जाएगा|
निम्नलिखित प्रश्नों
के उत्तर दे|
प्रश्न १) भारत के
धर्मग्रंथों के अनुसार राक्षसों को किस तरह के वरदान मिला करते थे?
उत्तर: __________________________________________________________
प्रश्न २) देवताओ ने
जितने भी राक्षसों का वध किया उन सब में क्या समान बात थी?
उत्तर:
__________________________________________________________
प्रश्न ३) रावण को कैसा
वरदान मिला था?
उत्तर:
_________________________________
प्रश्न ४) रावण को जो
वरदान ब्रम्हा ने दिया क्या उसके लिए ब्रम्हा को दोषी ठहराना उचित हैं? विस्तार
में समझाये|
उत्तर:
_____________________________________________________
प्रश्न ५) हर युग में
क्या हुआ?
उत्तर:
___________________________________
प्रश्न ६) राक्षसों के
विनाश में जनसहयोग की क्यों आवश्यकता होती हैं?
उत्तर:
_______________________________________
प्रश्न ७) धर्मग्रंथ लिपिबध्द
करने का उद्देश क्या हैं?
उत्तर:
__________________________________________
सभी प्रश्नों के उत्तर ध्यानपूर्वक वो लेख पढने के बाद दे| इस लेख में दी गयी घटनाओं का और अभी की सामाजिक और राजकीय परिस्थिति का क्या मेल हैं? इस प्रश्न का उत्तर कमेंट करिए और ये ब्लॉग सभी युवकों के साथ शेयर करिए.
वन्दे मातरम!
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